सुमेरपुर में शक्कर के दामों में उछाल से हड़कंप, शहर में 65 तो गांवों में 60 रुपए किलो तक बिक्री का आरोप;
स्टॉक जमाकर कृत्रिम किल्लत पैदा करने की चर्चाएं, जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
सुमेरपुर. रक्षाबंधन का त्योहार करीब आते ही शक्कर के बाजार में अचानक गर्मी बढ़ गई है. शक्कर के बढ़ते दामों ने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. शहर में शक्कर करीब 65 रुपए किलो और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 60 रुपए किलो तक बिकने की बात सामने आ रही है. त्योहार से ठीक पहले कीमतों में इस तेजी ने बाजार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
स्टॉक रोककर बनाया जा रहा ‘भाव का खेल’?
बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर त्योहार से पहले शक्कर के दाम लगातार क्यों बढ़ रहे हैं? व्यापारिक हलकों में चर्चा है कि कुछ कारोबारी शक्कर का स्टॉक रोककर बाजार में कृत्रिम किल्लत का माहौल तैयार कर रहे हैं और मांग बढ़ने के साथ मनमाने भाव वसूलने का खेल चल रहा है. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है.
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि त्योहार आते ही जरूरी खाद्य सामग्री के दामों में उछाल आना अब जैसे बाजार की मजबूरी बन गया है. सवाल यह भी है कि यदि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तो बाजार में भाव लगातार ऊपर क्यों जा रहे हैं?
‘कहां है निगरानी?’ जनता का सीधा सवाल
शक्कर जैसी रोजमर्रा की जरूरी वस्तु के भाव पर प्रशासन और संबंधित विभाग की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. उपभोक्ताओं की मांग है कि बाजार में थोक विक्रेताओं और बड़े स्टॉकिस्टों के गोदामों की जांच, खरीद-बिक्री के बिलों की पड़ताल और वास्तविक स्टॉक का सत्यापन कराया जाए.
रक्षाबंधन पर हर घर में मिठास घोलने की तैयारी है, लेकिन शक्कर के बढ़ते दामों ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्टॉक और कीमतों की जांच नहीं हुई तो त्योहार की आड़ में मुनाफाखोरी का खेल और तेज हो सकता है.
अब सवाल सीधा है—
क्या प्रशासन स्टॉक का सच सामने लाएगा या त्योहार की मिठास पर ‘स्टॉक खेल’ भारी पड़ेगा?
