जालोर नगर परिषद व दो नई बनी नगर पालिका में बोर्ड बनाने की दोनों पार्टियों के सामने चुनौती
जालोर नगर परिषद चुनाव में पार्टियां जिताऊ के साथ टिकाऊ पर कर रही फोकस
दिलीपसिंह बालावत
जालोर. जिले में निकाय चुनाव को लेकर अब दोनों पार्टी भाजपा और कांग्रेस ने कमर कस ली है, साथ ही इन पार्टियों से टिकट के इच्छुक दावेदार अब इनके पॉवर सेंटर के घर और कार्यालयों से संपर्क कर अपनी अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए चक्कर काट रहे हैं. इधर भाजपा और कांग्रेस अभी टिकट के दावेदारों को परख रहे हैं कि कौन कितना मजबूत है क्योंकि जीत के बाद दूसरे खेमे में जाने का डर भी रहता है ऐसे में पार्टी फिलहाल जिताऊ के साथ साथ टिकाऊ पर भी फोकस कर रही है, वही इस बार निर्दलीयों की ताल भी काफी तादात में दिखाई दे रही है क्योंकि सभापति की सीट सामान्य है. वही कांग्रेस नगर परिषद जालोर में पिछले दस साल से बाहर है तो वह यहां बोर्ड बनाना चाहेगी.
इधर जिले में इस बार आहोर और सायला दो नई नगर पालिका बनी है ऐसे में दोनों जगह सायला में जालोर विधायक व मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के लिए जालोर के साथ ही सायला में भी भाजपा का बोर्ड बनाना चुनौती है वही आहोर में विधायक छगनसिंह भी नगर पालिका बोर्ड भाजपा के खाते में लाने के प्रयास में है, क्योंकि वे पिछली बार पंचायत समिति चुनाव में कांग्रेस की चाल में उलझ चुके थे और पंचायत समिति प्रधान खो दिया था. वही कांग्रेस के लिए जालोर के
पॉवर सेंटर पुखराज पाराशर बोर्ड बनाने के प्रयास में रहेंगे ताकि जालोर जिले में गर्त में जा रही कांग्रेस को संजीवनी दे सके. हालांकि सायला में कांग्रेस के पास खोने को कुछ है नहीं.
कांग्रेस में पुखराज तो भाजपा में जोगेश्वर गर्ग मुख्य पॉवर सेंटर दिख रहे
नगर निकाय चुनाव हो या पंचायती राज या फिर विधानसभा के, कांग्रेस में फिलहाल पॉवर सेंटर पुखराज पाराशर है जो अंदर ही अंदर अपनी लॉबिंग कर चहेतों को टिकट दिलाने के प्रयास में रहते हैं. हालांकि इनके बाद जिलाध्यक्ष रमीला मेघवाल, जुल्फिकार अली भुट्टो, जिला प्रवक्ता योगेंद्र सिंह कुम्पावत व नगर अध्यक्ष मुमताज अली के यहाँ भी टिकट के दावेदार संपर्क कर रहे हैं. वही भाजपा में मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के अलावा नगर अध्यक्ष भाजपा रवि सोलंकी पॉवर सेंटर है जिनके यहां टिकट के इच्छुक दावेदार चक्कर काट रहे हैं.
पिछले दस साल से कांग्रेस को बोर्ड का इंतजार
नगर परिषद जालोर में कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए पिछले दस साल से इंतजार है क्योंकि लगातार दो कार्यकाल से भाजपा बोर्ड बनाने में कामयाब रही है, हालांकि पिछले चुनाव में दोनों ही दलों को बहुमत नहीं मिला था, और निर्दलीयों के सहारे भाजपा ने बोर्ड बनाया था.
