15 साल के करण ने कागज-गत्ते से बना दिए भवनों के मॉडल

बारीकी देखकर लोग हैरान; पिता नहीं, मां मजदूरी कर तीन बच्चों की पढ़ाई का उठा रही बोझ
सुमेरपुर/शिवगंज (पुखराज कुमावत ). हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता और सपने गरीबी की चौखट देखकर छोटे नहीं होते. सिरोही जिले के शिवगंज तहसील क्षेत्र के नया जोयला गांव से सामने आई 15 वर्षीय करण कुमावत की कहानी इसी हकीकत को बयां करती है. संसाधनों का अभाव है, पिता का साया करीब दो साल पहले उठ चुका है, घर चलाने के लिए मां मजदूरी करती हैं, लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बीच करण के हाथ जब कागज, गत्ता और सामान्य सामान उठाते हैं तो वह उन्हें ऐसी आकृतियों और भवनों के मॉडल में बदल देता है कि देखने वाला उसकी कल्पनाशक्ति और हुनर को देखकर दंग रह जाए.
करण कुमावत पुत्र सोनाराम कुमावत वर्तमान में एक निजी विद्यालय में कक्षा 10 का छात्र है. छोटी उम्र से ही उसे मकानों, बंगलों और भवनों की डिजाइन बनाने का जुनून है. तस्वीरों में उसके हाथों से तैयार मॉडल उसकी बारीकी, कल्पनाशक्ति और तकनीकी समझ की झलक देते हैं. उसका सपना भी उतना ही बड़ा है—पढ़ाई पूरी कर इंजीनियर बनना.
गरीबी से बड़ी मां की हिम्मत
करण के पिता सोनाराम कुमावत का करीब दो वर्ष पहले निधन हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी. पिता के निधन के बाद मां श्रीमती देवी कुमावत इधर-उधर मजदूरी कर अपने तीन बच्चों के पालन-पोषण और उनकी पढ़ाई का जिम्मा अपने कंधों पर उठा रही हैं.
परिवार में करण के अलावा उसकी बहन खुशी कुमावत कक्षा 8 और अंजली कुमावत कक्षा 5 में अध्ययनरत हैं. तीनों बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना मां के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन मां का हौसला बच्चों के सपनों के आगे कभी कमजोर नहीं पड़ा.
निजी स्कूलों की नजर भी करण के हुनर पर
करण के भीतर छिपी प्रतिभा अब आसपास के लोगों के साथ निजी विद्यालयों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है. उसकी डिजाइन और मॉडल बनाने की क्षमता देखकर स्कूलों की ओर से भी उसके हुनर में रुचि दिखाई जा रही है. लेकिन असली जरूरत सिर्फ तारीफ की नहीं, बल्कि ऐसे अवसर और संसाधनों की है, जिनसे करण अपनी प्रतिभा को तकनीकी शिक्षा में बदल सके.
सरकार से सवाल—क्या करण जैसे हुनर को मिलेगा सहारा?
करण की कहानी सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं, बल्कि उन ग्रामीण प्रतिभाओं का आईना है, जो पैसे और संसाधनों के अभाव में अपनी क्षमता के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पातीं. शहरों में सुविधाओं और महंगे प्रशिक्षण के बीच पलने वाले बच्चों को अवसर आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन गांव के गरीब परिवार का प्रतिभाशाली बच्चा आज भी अपने सपनों के लिए संघर्ष करता है.
ऐसे में अब समाज, जनप्रतिनिधियों और सरकार तक करण की आवाज पहुंचाने की जरूरत है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार के शिक्षा, कौशल विकास एवं प्रतिभा प्रोत्साहन से जुड़े विभाग यदि इस बच्चे की प्रतिभा का संज्ञान लेकर उसकी उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, मॉडल निर्माण के संसाधनों और आगे की पढ़ाई में सहयोग करें तो करण का सपना नई उड़ान भर सकता है.
आज करण कागज और गत्ते से भवनों का नक्शा बना रहा है. कल यही हाथ इंजीनियरिंग की ड्राइंग बनाकर देश के विकास की इमारत खड़ी कर सकते हैं. जरूरत सिर्फ इतनी है कि गरीबी उसके हुनर के रास्ते में दीवार न बने.
समाज से भी अपील
नया जोयला के इस होनहार बच्चे की प्रतिभा को केवल देखकर आगे न बढ़ें—इसे पहचानें, प्रोत्साहित करें और करण की शिक्षा व हुनर को आगे बढ़ाने में सक्षम सहयोग का माध्यम बनें. एक प्रतिभा को मिला सही अवसर केवल एक परिवार नहीं, पूरे समाज का भविष्य बदल सकता है.